आज फिर उसकी याद ने रुला दिया मुझको .
तन्हा हूँ आज ये अहसास करा दिया मुझको !
दो अक्षर लिखने का सलीका न था मेरे पास.
और उसके गम ने शायर बना दिया मुझको !!!
तन्हा हूँ आज ये अहसास करा दिया मुझको !
दो अक्षर लिखने का सलीका न था मेरे पास.
और उसके गम ने शायर बना दिया मुझको !!!